धन नहीं,मन बल के बदौलत बुद्धिजीवी राजनीति

बारीकी से दिमाग को जानो,
राजनीति के हर मैदान में जीतो

मन को राजनीति करना सिखाना है ,जन-जन को राजनीति करना सिखाना है। लेकिन पहले समझना है और समझाना है कि मन क्या है। मन अपने आप में एक संसार है। जिस तरह संसार अर्थात विश्व में अनेक प्रकार की चीजें हैं। इस तरह मन में कई तरह के संप्रत्यय हैं। इन्हें हम यथार्थ भी कह सकते हैं। अर्थात दुनिया में जो कुछ भी है उसकी छवि, बोध,ज्ञान, समझ अथवा रूप नाम मन के अंदर है।

दुनिया में हम आज जिस तरह बहुत सारी चीजों को देखते हैं किसी समय में उनका अस्तित्व ही नहीं था ,जैसे कि हवाई जहाज पानी जहाज मोटरसाइकिल कंप्यूटर मोबाइल फोन ऊंचे ऊंचे बड़े-बड़े ऐतिहासिक इमारतें इत्यादि। बहुत सारी चीज़ें सबसे पहले किसी के मन में उत्पन्न हुईं। आज हम जिन  चीजों को देखते हैं , उन्हें बाजार से खरीदते हैं और उनका उपयोग करते हैं, वह सब कुछ किसी न किसी के मन की उपज है।

दुनिया के बारे में भी यह कहा जाता है कि यह ईश्वर के मन में उपजी हुई कल्पना का रूपांतरण है। इसी प्रकार अगर हमारा मन अच्छी अच्छी चीजों का उत्पादन करे, तो हमारा जीवन सुख समृद्धि, खुशियों और हर प्रकार के संसाधनों से भरपूर होगी। देखा जाए तो जो भी हो रहा है वह सब कुछ मन का ही खेल है। राजनीति भी मन का ही खेल है। अब प्रश्न यह है कि राजनीति के मैदान में हर बाजी कैसे जीती जाए। इस प्रश्न का जवाब आगे प्रस्तुत है।

जब तक इंसान जंगलों, पर्वतों और पहाड़ों में रहता था, तब तक वह पशु के समान ही पेड़ों ,गुफाओं अथवा कंदराओं में रहता था। पशु और मनुष्य में मन का अंतर है। विज्ञान इस तथ्य को प्रमाणित करता है कि पशु रूपी बंदर के मन का विकास होने पर धीरे-धीरे पशु से मनुष्य अस्तित्व में आया।

मन का विकास होने के कारण ही मनुष्य संस्कृति,सभ्यता व संस्कार इत्यादि का सृजन कर समाज में रहने लगा। विज्ञान के अनुसार इस पृथ्वी में जीवन लगभग 50 हजार वर्ष पहले शुरू हुआ और 40 से 50000 वर्ष पहले मनुष्य का उद्धव बंदर से मानव रूप में हुआ। अर्थात लगभग 40000 वर्ष पहले मनुष्य का मन विकसित होना शुरू हुआ।

मनुष्य का मन विकसित होता जा रहा है अर्थात मानव के मन की शक्तियां इतनी बढ़ रही है कि नए-नए चीजों का सृजन करने की सोच इसमें उत्पन्न होती है। दार्शनिक लोग सदा मन को समझने की कोशिश करते हैं जिससे कि इसके अंदर दबी हुई शक्तियों का इतना विकास किया जाए कि मानव जीवन सुखमय हो जाए।

मन को समझना इसलिए आवश्यक है जिससे कि इसकी शक्तियों को जानकर विश्व कल्याण हेतु उनका सदुपयोग किया जा सके। यह कार्य राजनीति के क्षेत्र में भी बुलंदियों का कीर्ति पताका फहराने में बहुत मददगार होगा। आज की तारीख में राजनीति का खेल कोई गुल्ली डंडा का खेल नहीं है। Tremendous Think Tank वाली राजनीतिक पार्टी की ही राजनीति चल पाएगी। अतः राजनीति के खेल में जीत सुनिश्चित करने हेतु मन का उन्नयन अत्यंत आवश्यक है।

Published by Angel Kerketta

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