
राजनीति के अध्ययन के लिए राजनीति विज्ञान, राजनीतिक दर्शन,राजनीतिक चिंतन, राजनीतिक सिद्धांत, राजनीतिक शास्त्र तथा नागरिक शास्त्र इत्यादि प्रमुख विषय होते हैं । राजनीति विज्ञान के सब्जेक्ट मैटर्स या कॉन्सेप्ट्स — शक्ति, सत्ता, राज्य,संप्रभुता,स्वतंत्रता,अधिकार,कर्तव्य,न्याय,समानता, लोकतंत्र तथा नागरिकता इत्यादि हैं। इस ब्लॉग वेबसाइट के ब्लॉग एपिसोडस के द्वारा मैं आपको राजनीति से जुड़े महत्वपूर्ण थिअरीज,प्रिंसिपल्स ,इश्यूज, वैल्यूज,स्कोप, ऑब्जेक्टिव्स, करैक्टेरिस्टिक्स, अप्रोचेस,डाइमेंशनस एंड फील्ड्स इत्यादि विषय पर बहुत ही बुद्धिजीवी तरीके से ज्ञान प्रदान करूंगा।
राजनीति विज्ञान और जीव विज्ञान के जनक कहे जाने वाले अरस्तू ने राजनीति विज्ञान को सबसे शुद्ध, श्रेष्ठ, सर्वोत्तम तथा सुव्यवस्थित विज्ञान क्यों कहा?
गणित और विज्ञान मतलब की जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान इत्यादि विषयों को पढ़ने के लिए दसवीं की कक्षा में अच्छे नंबर और अच्छे प्रतिशत लाने होते हैं।जीव विज्ञान, भौतिक शास्त्र या रसायन शास्त्र इत्यादि विषयों में ईंधन भोजन ऊर्जा बल वेग आवेग आवेश या शक्ति के बारे में पढ़ा जाता है।
विद्युत शक्ति अथवा चुंबकीय शक्ति के बारे में विज्ञान के इन शाखाओं के माध्यम से ज्ञान अर्जित किया जाता है। लेकिन जो असली शक्ति है जिसके लिए लोग तरसते रहते हैं उस शक्ति के विषय में राजनीति विज्ञान में ही पढ़ा जाता है जिसके अध्ययन में गणित विषय की तरह फार्मूला, फंडा, समीकरण, सूत्र और विज्ञान की अन्य प्रमुख शाखाओं मतलब कि भौतिक और रसायन के महत्वपूर्ण एलिमेंट्स, मूवमेंट्स, मोबिलाइजेशन, इंजीनियरिंग,प्रोबलम सॉल्विंग, डिस्कवरी एंड इंवेंशन इत्यादि के साइंटिफिक स्टडी मैथड भी शामिल होते हैं।
राजनीति विज्ञान ही ऐसा विज्ञान है जिसमें दसवीं के बाद पढ़े जाने वाले पांच प्रमुख संकाय अर्थात १.कला २.विज्ञान ३.गणित ५.भूगोल और ५ .वाणिज्य इत्यादि विषयों के विषय वस्तुओं का सम्मिश्रण होता है। कहने का तात्पर्य यह है कि अगर आप राजनीति विज्ञान पढ़ेंगे तो आपको दुनिया के सभी विषयों का अध्ययन करना पड़ेगा क्योंकि राजनीति शास्त्र, नागरिक शास्त्र या राजनीति विज्ञान राजनीतिक शक्ति, हुकूमत शक्ति, जन शक्ति अथवा लोक शक्ति मतलब कि Political PoweRs for rule,reign,polity, administration and governance की विद्या और कला सिखाने के लिए पढ़ा जाता है और पढ़ाया भी जाता है।
किस वजह से गांव, देहात या घनघोर बीहड़ जंगलों में रहने वाला ठेंगा छाप आदमी भी राजनीति का धुरंधर खिलाड़ी बन सकता है?
हुकूमत चलाने की कला सीखने के लिए स्कूल या कॉलेज में एडमिशन लेने की जरूरत नहीं है। हमें प्राचीन काल और हमारे पुरखे पूर्वजों की परंपरा, प्रथा, संस्कृति, रीति रिवाज याद करना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि हमारे पूर्वज गांव, घर, देहात, आंगन , जंगल, झाड़, पहाड़ ,पर्वत,गली,मोहल्ला ,चौक ,चौपाल पंचायत इत्यादि में ही राजनीति का गहरा ज्ञान धूमकोरिया, घोटुल या अन्य युवा गृहों के माध्यम से नई पीढ़ी को प्रदान करते थे।
इसीलिए आज भी बहुत सारे ऐसे ठेंगा छाप राजनेता होते हैं जो 10,12 घंटा 5,10 साल तक पढ़ते रहने के बाद प्रशासनिक अधिकारी के पद पर विराजमान लोक सेवकों को भी अपनी उंगली के इशारे पर नचाते हैं। लोक सेवक प्रशासनिक अधिकारी या सरकारी नौकरी के अन्य विभागों के कर्मचारी 60 या 65 सालों तक सेवा मुक्त हो जाते हैं। लेकिन राजनीति करने वाले मौत के मुंह में जाने के पहले तक अर्थात 70,75 ,80, 85 या 90 वर्ष की उम्र तक हुकूमत चलाने का सुख भोगते रहते हैं।
राजनीति विज्ञान की भी बहुत सारी शाखाएं हैं। मुझे इस बात की बहुत ज्यादा खुशी कि मैं एक राजनीति की नई शाखा का प्रतिपादक advocate/ambassador/ postulator/propounder or professor/ हुं । राजनीति की इस नई शाखा का नाम है – बुद्धिजीवी राजनीति/IntelligenT PoliticS. इस नए विषय के संबंध में अधिक जानकारी के लिए यह ब्लॉग वेबसाइट सब्सक्राइब करें और इसमें डाले जाने वाले ब्लॉग्स को नियमित रूप से पढ़ें